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Sunday, January 9, 2022

Historical story :- टीन का सिपाही, (teen soldier),वर्चुअल दुनिया से बाहर, (out of the virtual world), जानवरों, कीट-पतंगों जैसे रेस्क्यू रोबोट, (Rescue robots like animals, insects), ढोंगी साधु, (hypocritical monk)

Best Historical story 


टीन का सिपाही, (teen soldier),वर्चुअल दुनिया से बाहर, (out of the virtual world), जानवरों, कीट-पतंगों जैसे रेस्क्यू रोबोट, (Rescue robots like animals, insects), ढोंगी साधु, (hypocritical monk)


(1) टीन का सिपाही


बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक बच्चा रहता था। उसने अपना जन्मदिन मनाया, तो बहुत से लोग आए। सभी कुछ न कुछ उपहार लेकर आए। एक मेहमान ने उसे उपहार में एक डिब्बा देते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि तुम इन खिलौनों को अवश्य पसंद करोगे।”
रात को सभी लोग चले गए। बच्चे ने बेसब्री से डिब्बे को खोला। उसमें टीन के पचीस सिपाही थे। सब के सब टीन के टुकड़ों से बने थे, इसलिए एक से लगते थे। वे योद्धाओं की तरह तनकर खड़े थे। नीले और लाल रंग की वर्दियों में वे खूब जंच रहे थे। वे एक ही डिब्बे में रहते थे, पर आपस में कभी नहीं झगड़ते थे। उस बच्चे ने बड़े प्यार से सबको एक-एक करके बाहर निकाला और एक पंक्ति में खड़ा कर दिया।
अचानक बच्चे की नजर एक सैनिक पर अटक गई। वह औरों से कुछ अलग दिख रहा था। वास्तव में उसे बनाते समय खिलौने वाले को टीन की कमी पड़ गई थी। उसने जैसे-तैसे उसे बनाया। पर वह एक टांग वाला सिपाही ही बन पाया। फिर भी रोबीली वर्दी में वह खूब जंच रहा था। 
उसी मेज पर और भी बहुत से खिलौने रखे थे। उनमें गत्ते का एक महल बहुत ही अद्भुत था। उस महल में छोटी-छोटी खिड़कियां थीं। महल के बाहर एक कतार से कई पेड़ लगे थे। वहीं एक शीशा रखा हुआ था। उस शीशे पर मोम की बतखें रखी थीं। शीशे में बतखें और पेड़ों की छाया दिखाई दे रही थी। इसलिए शीशा एक तालाब की तरह लग रहा था। एक सुंदर नर्तकी महल के खुले दरवाजे के पास खड़ी थी। उसके सुंदर कपड़ों पर एक रिबन में चमकीला पिन था। वह पिन हीरे की तरह चमक रहा था।
नर्तकी अपनी एड़ी पर खड़ी थी। नाचते समय उसका पैर इतनी ऊंचाई तक उठा हुआ था कि एक पैर वाले सिपाही को लगा कि वह भी उसी की तरह एक टांग वाली है। सैनिक ने सोचा, ‘काश, यह मेरी मित्र बन जाती! पर मैं जानता हूं, ऐसा कभी नहीं हो सकता। वह महल में रहती है, अच्छे कपड़े पहनती है और मैं रहता हूं एक डिब्बे में, वह भी अपने चौबीस भाइयों के साथ। भला वह मुझसे मित्रता क्यों करेगी?’ सोचते-सोचते वह एक डिब्बे के पीछे छिप गया। वहां से वह नर्तकी को आराम से देख सकता था।
सोते समय बच्चे ने सारे सैनिकों को डिब्बे में रख दिया। परंतु आड़ में होने के कारण एक टांग वाला सिपाही बाहर ही खड़ा रह गया। बाकी खिलौने भी वैसे ही बाहर पड़े रहे। धीरे-धीरे घर के सारे लोग सो गए।
सन्नाटा होते ही खिलौनों में जान आ गई। वे मस्ती में खेलने लगे। डिब्बे में बंद सिपाहियों ने शोर सुनकर बाहर आने का प्रयास किया, पर असफल रहे। इतना शोर हो गया कि कई चिड़ियां जागकर चहचहाने लगीं। इतना सब होने पर भी एक टांग वाला सिपाही चुप था। वह एकटक नर्तकी की ओर देख रहा था। यह देखकर उसे बड़ी खुशी हुई कि नर्तकी भी उसे देखकर मुसकरा रही थी।
तभी बारह बज गए और जोर से घंटा बजा। जिस डिब्बे के पीछे सैनिक छिपा था, वह अचानक से खुला और उसमें से एक जोकर उछलकर बाहर आ गया। सब डर गए और उसकी तरफ देखने लगे, सिवाए उस सैनिक और नर्तकी के।
“टीन के सैनिक! इस नर्तकी की तरफ मत देखो।” जोकर जोर से चिल्लाया, परंतु सैनिक पर कोई असर नहीं हुआ।
“ठीक है, तुमने मेरा अपमान किया, कल तुम्हें दंड दूंगा।” जोकर ने धमकी दी और अपने डिब्बे में जा बैठा।
सवेरा हुआ। बच्चे ने सारे खिलौनों से खेलना शुरू किया। उसे विशेष रूप से एक टांग वाले सिपाही पर ज्यादा प्यार आ रहा था। वह उसी से ज्यादा खेल रहा था। अचानक उसे मां ने पुकारा। जल्दी में वह सिपाही को खिड़की पर रखकर चला गया।
अब पता नहीं, यह जोकर की शैतानी थी या अचानक आई हवा की, झटके से खिड़की का पल्ला खुल गया। हवा के झोंके से बेचारा सैनिक तीसरी मंजिल से नीचे की झाड़ियों में जा गिरा। गिरते समय वह चौकस था। उसने अपने को मोड़ लिया,  जिससे उसकी बंदूक पर लगा चाकू जमीन में गड़ गया। उसे चोट लगी, पर उसे ज्यादा दुख इस बात का था कि वह नर्तकी से बिछुड़ गया था।
बच्चे ने उसे खिड़की पर नहीं देखा, तो सब समझ गया। वह अपने मित्रों के साथ नीचे आया। बहुत ढूंढ़ा, पर वे असफल रहे। निराश होकर वे वापस चले गए। झाड़ियों में पड़ा सैनिक चुपचाप अपने मालिक को वापस जाता देखता रहा।
थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गई और उसने जल्दी ही तूफान का रूप ले लिया। अंत में जब बारिश रुकी, तो कुछ बच्चे खेलते हुए उधर आ निकले। अचानक एक की नजर सिपाही पर पड़ी।
“अरे, यह देखो, टीन का सिपाही!” कहते हुए बच्चे ने उसे उठा लिया।
“चलो, इसे एक यात्रा पर भेजें।” एक अन्य बच्चे ने शरारत से कहा। सिपाही उसका मतलब नहीं समझ सका। बच्चों ने अखबार से एक बड़ी नाव बनाई। उसमें सिपाही को खड़ा किया और बहते नाले में छोड़ दिया। बहती नाव को देखकर बच्चे ताली बजाते हुए पीछे भागे। इतनी तेज बारिश हुई थी कि नाले में भयंकर लहरें सी उठ रही थीं। कागज की नाव हिचकोले खाती हुई आगे बढ़ रही थी, पर बहादुर सैनिक उस नाव में तनकर खड़ा रहा।
बहते-बहते नाव, नाली के बंद हिस्से में प्रवेश कर गई। वहां सुरंग जैसा अंधेरा था। सैनिक को लगा, जैसे वह अपने बंद डिब्बे में वापस आ गया हो। उसने सोचा, “पता नहीं, इस यात्रा का अंत कहां होगा। काश! इस रोमांचक यात्रा में मेरी मित्र नर्तकी भी मेरे साथ होती।”
तभी वहां एक मोटा-ताजा चूहा आया। नाले में नए मेहमान को देखकर वह चिल्लाया, “तुम अंदर कैसे आ गए? तुम्हें अंदर आने की अनुमति किसने दी?”
टीन के सैनिक ने कोई जवाब नहीं दिया। संभावित हमले से बचने के लिए उसने बंदूक को जोर से पकड़ लिया।
चूहे को यह अपमानजनक लगा। वह चिल्लाते हुए उसकी ओर भागा, “ठहरो! अभी मजा चखाता हूं।”
सैनिक फिर भी नहीं डरा, मजबूती से खड़ा रहा। आंख-मिचौली चलती रही। चूहे से बचते हुए वह नाले के आखिरी सिरे पर पहुंच गया। वहां उसे रोशनी दिखाई दी। उसने चैन की सांस ली ही थी कि भयंकर शोर सुनकर घबरा गया। वह एक बड़ी मुसीबत में फंसने जा रहा था। नाले का पानी तेजी से एक नदी में गिर रहा था।
कागज की नाव बहती हुई नदी में जा गिरी। सैनिक ने बड़ा प्रयास किया, पर अब वह तनकर खड़ा न रह सका। नाव भी गल गई थी। देखते-देखते नाव डूब गई। सैनिक की हालत आसमान से गिरे खजूर पर अटके वाली हो गई। वह पानी में डूबने लगा।
परंतु अभी उसकी परेशानियों का अंत नहीं हुआ था। अचानक एक बड़ी सी मछली आई और उसे निगल गई। सैनिक ने घबराकर सोचा, ‘हे भगवान, यह मैं कहां आ फंसा। यहां तो उस नाले से भी ज्यादा अंधेरा है।’
सैनिक की बंदूक की नोंक मछली को चुभी, तो वह जोर-जोर से उछलने लगी। सैनिक परेशान था। अचानक उसे झटका लगा। उसे महसूस हुआ जैसे मछली छटपटा रही हो।
वास्तव में मछली एक जाल में फंस गई थी। मछुआरों ने बड़ी सी मछली को देखा, तो खूब प्रसन्न हुए। उसे बाजार में ले जाकर अच्छे दामों में बेच दिया। एक नौकरानी ने उसे खरीदा और अपने मालिक के घर ले आई।
मछली के अंदर टीन का सिपाही था। रसोइए ने मछली को काटा, तो टीन का सिपाही निकल आया। रसोइए ने उसे उठाया और घर के अंदर जाकर एक बच्चे को दे दिया। बच्चे ने देखा, तो बहुत खुश हुआ। उस सैनिक की प्रशंसा करने लगा। आखिर बहुत कम लोग होते हैं, जो मछली की पेट में यात्रा करते हैं। बच्चे ने टीन के सिपाही को सीधा खड़ा किया।
सैनिक ने मिचमिचाते हुए आंखे खोलीं। उसने चारों ओर आश्चर्य से देखा। फिर सोचा, ‘यह दुनिया तो सचमुच गोल है।’
वह फिर से उसी कमरे में आ गया था, जहां से उसने यात्रा शुरू की थी। वही बच्चा था, वहीं खिलौने थे, वही टीन के उसके भाई, वही जोकर और...वही महल। महल के बाहर वही नर्तकी खड़ी थी। दोनों ने एक दूसरे को देखा। मुसकराए, पर कुछ नहीं बोले।
“अब मैं अपने बहादुर सैनिक को संभालकर रखूंगा।” बच्चे ने प्यार से उसे साफ करते हुए कहा।
रात हुई। सभी सो गए। परंतु खिलौने फिर जाग उठे। फिर से जोकर बाहर निकला, पर इस बार उसने कुछ नहीं कहा। सबके साथ खेलने लगा। नर्तकी भी खेल में शामिल हो गई। 
सबको खुश देखकर वह सैनिक भी आखिर हंस ही पड़ा। वह अपनी लंबी यात्रा की सारी थकान भूल गया।

teen soldier

 That was a long time ago.  A child lived in a town.  He celebrated his birthday, so many people came.  Everyone brought some kind of gift.  A guest gave her a gift box and said, “I hope you will definitely like these toys.”

 Everyone left at night.  The child eagerly opened the box.  There were twenty-five tin soldiers in it.  All of them were made of tin snips, so they looked alike.  They stood erect like warriors.  He was looking great in blue and red uniforms.  They lived in the same compartment, but never quarreled with each other.  The child took everyone out one by one with great love and made them stand in a row.

 Suddenly the child's eyes were fixed on a soldier.  He looked a little different from the others.  In fact, the toy guy was short of tin while making it.  That's how he made it.  But he could only become a one-legged soldier.  Still, he was looking great in a robe uniform.

 There were many other toys on the same table.  A cardboard palace in them was very wonderful.  There were small windows in that palace.  There were many trees in a row outside the palace.  There was a mirror there.  There were wax ducks on that mirror.  Ducks and the shadows of trees were visible in the mirror.  That's why the mirror looked like a pond.  A beautiful dancer was standing near the open door of the palace.  On her beautiful clothes was a shiny pin in a ribbon.  That pin was shining like a diamond.

 The dancer stood on her heels.  While dancing, her leg was raised to such a height that the one-legged soldier felt that she was also one-legged like him.  The soldier thought, 'I wish she would be my friend!  But I know it can never happen.  She lives in the palace, wears nice clothes and I live in a box, that too with my twenty-four brothers.  Why would she be friends with me?’ He hid behind a box thinking.  From there he could see the dancer comfortably.

 While sleeping, the child put all the soldiers in the box.  But being under cover, the one-legged soldier was left standing outside.  The rest of the toys remained outside as well.  Slowly everyone in the house fell asleep.

 As soon as there was silence, the toys came to life.  They started playing for fun.  The soldiers in the compartment tried to come out after hearing the noise, but were unsuccessful.  There was so much noise that many birds woke up and started chirping.  Despite all this, the one-legged soldier was silent.  He was staring at the dancer.  He was very happy to see that the dancer was also smiling seeing him.

 Then it was twelve o'clock and the bell rang loudly.  The compartment behind which the soldier was hiding suddenly opened and a clown jumped out of it.  Everyone got scared and started looking at him, except the soldier and the dancer.

 "Teen soldiers!  Don't look at this dancer."  The Joker shouted loudly, but to no avail.

 "Okay, you insulted me, I'll punish you tomorrow."  Joker threatened and went to his compartment.

 It's morning  The child started playing with all the toys.  He was especially fond of the one legged soldier.  He was playing more than that.  Suddenly his mother called him.  In a hurry, he left, keeping the soldier at the window.

 Now I don't know whether it was the witchcraft of the clown or the sudden wind, with a jolt, the window sill opened.  Due to a gust of wind, the poor soldier fell into the bushes below from the third floor.  He was attentive when he fell.  He turned himself, causing the knife on his gun to hit the ground.  He was hurt, but what hurt him more was that he was separated from the dancer.

 The child did not see him at the window, so everything was understood.  He came down with his friends.  Searched a lot, but they failed.  Disappointed, they went back.  The soldier lying in the bushes silently watched his master go back.

 After a while it started raining and it quickly took the form of a storm.  At last when the rain stopped, some children came out playing.  Suddenly one eye fell on the soldier.

 "Hey, look at this, teen soldier!"  Saying that the child picked him up.

 "Come on, send it on a trip."  Another child said mischievously.  The soldier could not understand what he meant.  The children made a big boat out of newspaper.  He raised the soldier in it and left it in the flowing drain.  Seeing the drifting boat, the children ran behind clapping.  It had rained so heavily that there were fierce waves rising in the drain.  The paper boat was moving forward hesitantly, but the brave soldier remained standing in that boat.

 While drifting, the boat entered the closed part of the drain.  There it was dark like a tunnel.  The soldier felt as if he had returned to his locked compartment.  He thought, "I don't know where this journey will end.  Hopefully!  My friend dancer would also accompany me on this exciting journey.”

 Then a fat-fresh mouse came there.  Seeing the new guest in the creek, he cried out, "How did you get in?  Who gave you permission to come in?"

 The teen soldier did not respond.  He grabbed the gun tightly to avoid a possible attack.

 The mouse found it humiliating.  He ran towards her shouting, "Hold on!  I'm just enjoying it."

 Still the soldier was not scared, he stood firm.  The eyes kept rolling.  Avoiding the mouse, he reached the end of the drain.  There he saw light.  He had just taken a sigh of relief when he was horrified to hear the terrible noise.  He was going to get into a big trouble.  The water of the drain was falling fast in a river.

 The paper boat fell into the flowing river.  The soldier tried hard, but now he could not stand still.  The boat had also sunk.  Suddenly the boat sank.  The condition of the soldier became stuck on the dates that fell from the sky.  He started drowning in the water.

 But his troubles were not over yet.  Suddenly a big fish came and swallowed it.  The soldier thought nervously, 'Oh my God, where have I got stuck in this?  Here it is even darker than that drain.

 When the tip of the soldier's gun pierced the fish, it jumped loudly.  The soldier was upset.  Suddenly he got a shock.  He felt as if the fish was sobbing.

 The fish was actually caught in a net.  When the fishermen saw the big fish, they were very happy.  He took it to the market and sold it at a good price.  A maid bought it and brought it to her master's house.

 Inside the fish was a tin soldier.  When the cook cut the fish, the tin soldier came out.  The cook picked it up and went inside the house and gave it to a child.  When the child saw it, he was very happy.  He started praising the soldier.  After all, there are very few people who travel in the belly of a fish.  The child made the tin soldier stand upright.

 The soldier blinked and opened his eyes.  He looked around in surprise.  Then thought, 'This world is really round.'

 He was again in the same room from where he had started the journey.  It was the same child, there were toys, the same teen brothers, the same clowns and... the same palace.  The same dancer was standing outside the palace.  Both looked at each other.  He smiled but didn't say anything.

 "Now I will preserve my brave soldier."  The child lovingly cleaned it and said.

 night fell.  Everyone fell asleep.  But the toys woke up again.  Joker came out again, but this time he didn't say anything.  Started playing with everyone.  The dancer also joined the game.

 Seeing everyone happy, that soldier also laughed at last.  He forgot all the fatigue of his long journey.
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(2) वर्चुअल दुनिया से बाहर

 साहिल स्कूल से आते ही मम्मी का मोबाइल लेकर गेम खेलना शुरू कर देेता या सोशल साइट्स पर चैटिंग करने लगता। एक बार वह खेलने बैठता, तो घंटों तक खेलता ही रहता। उसे न होमवर्क की चिंता रहती और न ही खाने की। फुटबॉल खेलना, गिटार बजाना और मोबाइल पर गेम खेलना उसकी हॉबी थी। पर अब वह सब कुछ भूलकर सुबह से लेकर शाम तक बस मोबाइल पर ही खेलता रहता।

मम्मी-पापा दोनों के मना करने के बावजूद साहिल नहीं मानता। अपनी इस आदत की वजह से वह पढ़ाई में भी पिछड़ता जा रहा था। फिजिकल एक्टिविटी न होने से उसका वजन भी लगातार बढ़ता जा रहा था। मम्मी चाहती थीं कि साहिल खेलने के साथ-साथ पढ़ाई और अपनी हेल्थ पर भी ध्यान दे। पर साहिल उनकी कोई बात मानने को तैयार ही नहीं था। मम्मी अब उसे समझाने के लिए कोई और तरीका सोच रही थीं।
परीक्षा खत्म हो चुकी थी। इस बार छुट्टियों में मम्मी-पापा साहिल को लेकर गांव जाने की योजना बना रहे थे। दरअसल मम्मी चाहती थीं कि साहिल इस बार छुट्टियां दादाजी के साथ बिताए। उनके साथ गांव घूमे। उनसे अच्छी आदतें सीखे और जैसे वे फिट रहते हैं, वैसे ही साहिल भी रहे। 
छुट्टियों में साहिल भी मम्मी-पापा के साथ जाने को तैयार हो गया। उसने सोचा, ‘वहां जाकर तो मम्मी मुझे पढ़ाई के लिए टोकेंगी नहीं। मैं मजे से पूरा दिन मोबाइल पर खेलता रहंूगा। वाह! कितना मजा आएगा।’ 
मम्मी ने साहिल की मोबाइल पर खेलने की लत के बारे में दादाजी को पहले ही बता दिया था। उन्होंने भी साहिल को ‘वर्चुअल वर्ल्ड’ से निकालकर वास्तविक दुनिया में लाने और पढ़ाई तथा सेहत की ओर ध्यान दिलाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। 
छुट्टी होते ही साहिल मम्मी-पापा के साथ गांव पहंुचा। वहां पहुंचते ही दादाजी ने उसे गले लगा लिया। उसे अपने कमरे में ही रखा। सोते समय सुबह जल्दी उठकर अपने साथ सैर पर चलने को कहा। साहिल ने भी उनका मन रखने के लिए हां कह दिया।
अगले दिन सुबह जब साहिल नहीं उठा, तो दादाजी ने स्वयं जाकर उसे उठाया। जैसे-तैसे वह उठा और  तैयार होकर दादाजी के साथ चल पड़ा। थोड़ी देर बाद घूमते-घूमते साहिल को भी मजा आने लगा। रास्ते में दादाजी ने उसे कई पंछी दिखाए और जब उनके नाम पूछे, तो साहिल बता नहीं पाया। दादाजी ने कहा, “बेटा, मैंने तो सुना है, तुम अपनी मम्मी का स्मार्ट फोन बहुत इस्तेमाल करते हो। क्या उस पर यह सब पता नहीं चलता?”
दादाजी की बात सुनकर साहिल को शर्मिंदगी महसूस हुई। दरअसल वह दादाजी को नहीं बता पाया कि वह तो बस मोबाइल पर गेम खेलता है या दोस्तों से चैटिंग करता है।
दादाजी ने रास्ते में साहिल को कई तरह के पेड़-पौधे, खेत-खलिहान और अपने गांव की नदी भी दिखाई। हालांकि नदी में पानी ज्यादा नहीं था। साहिल को सुबह का यह नजारा बहुत अच्छा लगा।
घर लौटते ही साहिल तो बिस्तर पर लेट गया और दादाजी ने आंगन में कसरत शुरू कर दी। उन्हें देखकर साहिल की आंखें खुली की खुली रह गईं। कुछ देर बाद साहिल की मम्मी उसके लिए नाश्ता ले आईं, तब जाकर साहिल को राहत मिली।
 दो दिन बाद साहिल के ममेरे भाई अमित का जन्मदिन था। दादाजी ने आसपास के सभी बच्चों को घर बुला लिया था। पार्टी के लिए दादाजी ने पूरा इंतजाम कर रखा था। 
बच्चों को घर आया देख साहिल भी कमरे से बाहर आ गया और उनके साथ खेलने लगा। सब बच्चों ने खूब मस्ती की। साहिल को उनके साथ बहुत मजा आ रहा था। इस तरह की मस्ती उसने बहुत समय बाद की थी। पार्टी के बाद सब बच्चे अपने-अपने घर जाने लगे, तोे दादाजी ने सबको अगले दिन शाम को फिर आने को कहा। 
दरअसल अगले दिन दादाजी ने बच्चों के लिए ‘वन मिनिट गेम’ और ‘कविता प्रतियोगिता’ रखी थी, जिसमें विजेता को पुरस्कार भी मिलने वाला था। प्रतियोगिता का निर्णय करने के लिए दादाजी ने अपने कुछ दोस्तों को भी बुलाया था।
शाम को जब बच्चे घर पर इकट्ठे हो गए, तो साहिल ने केवल ‘वन मिनिट गेम’ में हिस्सा लिया। वह सोचने लगा, ‘जब मैं तीसरी कक्षा में था, तो स्कूल में हर बार कविता प्रतियोगिता में भाग लेता था। कभी मैं खुद अपनी लिखी कविता सुनाता था, तो कभी मम्मी मुझे प्रतियोगिता की तैयारी करवाती थीं। कई बार तो मुझे पहला पुरस्कार भी मिला। पर अब अपने घर में कविता प्रतियोगिता है, तो मैं भाग नहीं ले पा रहा हूं।’ 
साहिल की समझ में नहीं आ रहा था कि कौन सी कविता सुनाए। जब बाकी बच्चे अपनी कविता सुना रहे थे, तब साहिल सोच रहा था, ‘जब से मैंने मोबाइल पर गेम खेलना शुरू किया है तब से ही मैंने पढ़ाई और स्कूल की एक्टिविटी पर ध्यान देना बंद कर दिया है। और तो और, अब मैं घर आकर मम्मी को बताता तक नहीं हंू कि स्कूल में कब क्या चल रहा है।’ अब साहिल ने मन ही मन तय कर लिया था कि वह मोबाइल पर इतनी ज्यादा देर तक नहीं खेलेगा। 
कविता प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद दादाजी ने तीन विजेताओं को ईनाम दिया। फिर सबने खूब डांस किया और खाना खाने के बाद अपने-अपने घर लौट गए।
कुछ दिनों बाद साहिल भी मम्मी-पापा के साथ शहर वापस आ गया। गांव से आने के बाद साहिल बदल चुका था। अब वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सेहत पर भी ध्यान देने लगा था। वह रोज होमवर्क करने के बाद पार्क में घूमने जाने लगा।
एक हफ्ते बाद जब मम्मी दादाजी से फोन पर बात कर रही थीं तो उसने सुना कि मम्मी कह रही हैं, “थैंक्स पापाजी! आपका प्लान काम कर गया।” 
साहिल को गांव जाने और दादाजी की पूरी योजना को समझने में देर नहीं लगी। वह कमरे से बाहर आया और मम्मी के गले लग गया। फिर बोला, “आप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हो। मुझे फिर से पहले जैसा साहिल बनाने के लिए थैंक्स मम्मी।”

 out of the virtual world

 As soon as Sahil came from school, he would take his mother's mobile and start playing games or chatting on social sites.  Once he sat down to play, he would keep playing for hours.  He was neither worried about homework nor about food.  His hobbies were to play football, play guitar and play games on mobile.  But now forgetting everything, he used to play only on mobile from morning till evening.

 Despite both parents' refusal, Sahil does not agree.  Because of this habit, he was falling behind in studies also.  Due to lack of physical activity, his weight was also increasing continuously.  Mother wanted Sahil to play and pay attention to studies and his health as well.  But Sahil was not ready to accept any of his words.  Mom was now thinking of some other way to explain it.

 The exam was over.  This time the parents were planning to go to the village with Sahil during the holidays.  Actually mother wanted Sahil to spend holidays with grandfather this time.  Walk around the village with them.  Learn good habits from them and stay fit as they stay fit.

 Sahil also agreed to go with his parents during the holidays.  He thought, 'Going there, my mother will not interrupt me for studies.  I will happily play on mobile all day.  Wow!  How much fun it will be.'

 Mummy had already told Grandfather about Sahil's addiction to playing on mobile.  He too had made all preparations to bring Sahil out of the 'virtual world' into the real world and pay attention to studies and health.

 As soon as the holiday was over, Sahil reached the village with his parents.  As soon as he reached there, Grandfather hugged him.  Kept him in his room.  Waking up early in the morning while sleeping, asked to go for a walk with him.  Sahil also said yes to keep his mind.

 When Sahil did not wake up the next morning, Grandfather himself went and picked him up.  As soon as he got up and got ready, he went with Grandfather.  After a while, Sahil also started enjoying while roaming around.  On the way, Grandfather showed him many birds and when asked their names, Sahil could not tell.  Grandfather said, "Son, I have heard that you use your mother's smart phone a lot.  Doesn't he know about it all?"

 Sahil felt embarrassed after hearing grandfather's words.  Actually he could not tell Grandpa that he just plays games on mobile or chats with friends.

 Grandfather also showed Sahil a variety of trees, plants, fields and barns and the river of his village on the way.  However, there was not much water in the river.  Sahil liked this morning view very much.

 On returning home, Sahil lay down on the bed and Grandfather started exercising in the courtyard.  Seeing them, Sahil's eyes were wide open.  After some time Sahil's mother brought him breakfast, then Sahil was relieved.

 Two days later it was the birthday of Sahil's cousin Amit.  Grandfather had called all the children around him home.  Grandfather had made all the arrangements for the party.

 Seeing the children coming home, Sahil also came out of the room and started playing with them.  All the kids had a lot of fun.  Sahil was having a lot of fun with them.  He had such fun after a long time.  After the party all the children started going to their respective homes, so Grandfather asked everyone to come again the next day in the evening.

 In fact, the next day Grandfather had organized 'One Minute Game' and 'Poetry Competition' for the children, in which the winner was also going to get a prize.  Grandfather had also called some of his friends to decide the competition.

 In the evening when the children gathered at home, Sahil only took part in the 'One Minute Game'.  He started thinking, 'When I was in third grade, I used to participate in poetry competition every time in school.  Sometimes I used to recite my own poetry, sometimes my mother used to make me prepare for the competition.  Sometimes I even got the first prize.  But now I have poetry competition in my house, so I am not able to participate.

 Sahil could not understand which poem to recite.  While the rest of the children were reciting their poem, Sahil was thinking, 'Ever since I started playing games on mobile, I have stopped paying attention to studies and school activities.  What's more, now I don't even come home and tell my mom what's going on in school.' Now Sahil had decided in his mind that he would not play on mobile for so long.

 After the poetry competition was over, Grandfather gave prizes to the three winners.  Then everyone danced a lot and after having dinner returned to their respective homes.

 After a few days, Sahil also returned to the city with his parents.  Sahil had changed after coming from the village.  Now he started focusing on his health along with his studies.  Every day after doing homework, he started going for a walk in the park.

 A week later, when Mummy was talking to Grandpa on the phone, she heard Mummy saying, “Thanks Papaji!  Your plan worked."

 It didn't take long for Sahil to go to the village and understand Dadaji's entire plan.  He came out of the room and hugged his mother.  Then said, "You are the best mom in the world.  Thanks mom for making me Sahil like before."
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(3) जानवरों, कीट-पतंगों जैसे रेस्क्यू रोबोट

बचाव कार्य के लिए नासा से लेकर कई बड़ी यूनिवर्सिटी और कई देशों के रिसर्च संगठनों ने कई रेस्क्यू रोबोट बनाए हैं। जैसे कि स्नेक रोबोट्स जो किसी भी दीवार और पतली जगह में जाने में सक्षम है। क्रैम यानी कॉकरोच रोबोट, जो किसी भी गड्ढे में घुसकर अंदर का हाल आराम से बता सकता है। अमेरिका में बनाया गया वाइन रोबोट तो देखने में किसी पाइप जैसा है, पर यह अपनी शेप भी बदल सकता है और खुद को खूब लंबा भी कर सकता है। इसमें कई सेंसर और कैमरे लगे हैं, जिसके कारण इसे रिमोट कंट्रोल की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं नासा ने गोरिल्ले की तरह खड़े होने वाला एक रोबोट बनाया है, ताकि वह किसी भी सतह पर खड़ा होकर काम कर सके। अमेरिका के मैक्सिको में एक इमारत के ढहने के दौरान स्नेक रोबोट की मदद से मलबे के नीचे दबे लोगों को ढूंढने और बचाने में खूब मदद मिली। अब जमीन के नीचे दबे लोगों को ढूंढने, सागर तल के नीचे तक पहुंच जाने वाले रेस्क्यू रोबोट भी बन गए हैं। चीता रोबोट भी बन चुके हैं। 

Rescue robots like animals, insects

 For rescue work, from NASA to many big universities and research organizations of many countries, many rescue robots have been made.  Such as snake robots which are capable of moving into any wall and thin space.  Cram means cockroach robot, which can enter any pit and tell the condition inside comfortably.  The wine robot made in America looks like a pipe, but it can also change its shape and can also make itself very long.  It has many sensors and cameras, due to which it does not require remote control.  At the same time, NASA has made a robot standing like a gorilla, so that it can work standing on any surface.  During the collapse of a building in Mexico, USA, with the help of snake robot, it helped a lot to find and save people buried under the rubble.  Now rescue robots have also become available to find people buried under the ground, reaching the bottom of the ocean floor.  Cheetahs have also become robots.
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(4) ढोंगी साधु

राजा कृष्णदेव राय साधु-संतों का बड़ा आदर करते थे। उन्हें भोजन और वस्त्र भी राजा की ओर से मिलते थे। यह देख, बहुत से निठल्ले लोग भी साधु बनकर मौज उड़ाने लगे।

खर्च बढ़ने लगा, तो राजा परेशान हो गए। उन्होंने दरबारियों से कहा। दरबारी बोले, ‘‘महाराज, अगर नकली साधु यहां से चले जाएं, तो खर्च घट जाएगा।’’
‘‘मगर असली-नकली का पता कैसे चले?’’ राजा बोले। 
नीचा दिखाने का उचित अवसर जान दरबारियों ने तेनालीराम का नाम सुझाया। राजा ने तेनालीराम को यह काम सौंप दिया।
तेनालीराम ने राज्य के साधुओं की गिनती कराई। फिर ढिंढोरा पिटवाया, ‘‘राज्य के प्रत्येक साधु के गले में राजा की तसवीर लटकी रहनी चाहिए। जिसके गले में तसवीर न होगी, उसे न भोजन मिलेगा, न वस्त्र दिए जाएंगे।’’
अगले दिन भोजन करने आए साधुओं के गले में राजा की तसवीर लटकी हुई थी। तेनालीराम ने उनकी गिनती कराई। गिनती के हिसाब से बारह साधु कम थे।
तेनालीराम ने सिपाही भेजकर उन्हें बुलवाया। साधु आए, तो तेनालीराम ने पूछा, ‘‘आप लोग भोजन करने क्यों नहीं आए?’’
‘‘हम भगवान के पुजारी हैं। राजा की तसवीर गले में क्यों लटकाएं? ऐसे राजा से अन्न का एक दाना लेना भी पाप है।’’ साधु बोले।
तेनालीराम उन साधुओं को राजा के पास ले गया। बोला, ‘‘महाराज, असली साधु ये ही हैं।’’ राजा ने पूरी बात सुनी। नकली साधुओं को भगा दिया गया। तेनालीराम की प्रशंसा की। 
इसके बाद किसी निठल्ले ने ढोंगी साधु बनने की हिम्मत नहीं की।

hypocritical monk

 King Krishna Deva Raya had great respect for the sages and saints.  They also got food and clothes from the king.  Seeing this, many lowly people also started having fun by becoming sadhus.

 When the expenses started increasing, the king got upset.  He told the courtiers.  The courtier said, "Sir, if the fake sadhus leave from here, the expenses will come down."

 "But how to know the real and fake?" said the king.

 The courtiers suggested Tenaliram's name as an opportune time to humiliate him.  The king entrusted this task to Tenaliram.

 Tenaliram got the state's sadhus counted.  Then he thrashed the drummer, "The picture of the king should hang around the neck of every sadhu of the state.  He who will not have a picture in his neck, will not get food, nor will he be given clothes.

 The picture of the king was hanging around the neck of the sadhus who came to eat the next day.  Tenaliram got them counted.  Twelve sadhus were less by number.

 Tenaliram sent a soldier and called him.  When the sage came, Tenaliram asked, "Why didn't you guys come to eat?"

 "We are the priests of God.  Why hang the king's picture around the neck?  Taking even a grain of food from such a king is a sin.” Said the monk.

 Tenaliram took those sadhus to the king.  Said, "Sir, these are the real sadhus." The king listened to the whole thing.  Fake sadhus were driven away.  Praised Tenaliram.

 After this none of the gullible dared to become a hypocrite monk.
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