🐇🐒🐿️ खरगोश, बंदर और गिलहरी की कहानी
🐇🐒🐿️ खरगोश, बंदर और गिलहरी की कहानी
एक हरे-भरे जंगल में तीन अच्छे दोस्त रहते थे—
फुर्तीला खरगोश,
शरारती बंदर, और
चतुर गिलहरी।
तीनों का स्वभाव अलग था, पर दोस्ती बहुत गहरी थी।
एक दिन जंगल में खबर फैली कि पास वाले गाँव में एक किसान ने ढेर सारे मीठे फल और मूँगफली रखी है।
खरगोश बोला –
“अगर हमें वो फल मिल जाएँ तो मज़ा आ जाए।”
बंदर ने हँसते हुए कहा –
“चढ़ना तो मुझे आता है, मैं पेड़ पर कूदकर टोकरी गिरा दूँगा।”
गिलहरी बोली –
“और मैं अपने छोटे-छोटे दाँतों से मूँगफली तोड़ लूँगी।”
तीनों ने मिलकर योजना बनाई।
शाम को जब किसान आराम करने चला गया, तो बंदर सबसे पहले दीवार फाँद गया और पेड़ से टोकरी नीचे गिरा दी।
खरगोश फुर्ती से दौड़कर सारे फल एक जगह इकट्ठा करने लगा।
गिलहरी ने मूँगफली तोड़-तोड़ कर सबको बाँट दी।
तीनों ने खूब पेट भरकर खाया। खाने के बाद खरगोश बोला –
“देखो, अगर हम सब मिलकर काम करें तो मुश्किल काम भी आसान हो जाते हैं।”
बंदर ने सिर हिलाया और कहा –
“हाँ, अकेले मैं सिर्फ टोकरी गिरा सकता था, पर फल ले जाना मुश्किल था।”
गिलहरी मुस्कुराई –
“और बाँटना तो दोस्त ही सिखाते हैं।”
उस दिन से तीनों ने तय किया कि चाहे खुशी हो या मुश्किल, वे हमेशा मिल-जुलकर रहेंगे।
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कहानी की सीख (Moral of the Story):
👉 सच्ची दोस्ती में सबकी ताक़त जुड़ जाती है और मिलकर हर काम आसान हो जाता है.
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