100+ नानी की पहेलियां, (Nani ki paheliya)
पहेलियाँ भी हमारे लोक साहित्य का एक अभिन्न अंग हैं, बहुत सी पहेलियाँ कहावतों के रूप में भी प्रयोग होती हैं, पुरानी पहेलियाँ जिन चीजों पर बनाई गई हैं उन में से बहुत सी चीजें आजकल की पीढ़ियों ने देखी ही नहीं हैं ( जैसे कुम्हार का चाक, चरखा, डोली, फूट नाम का फल, चूल्हा आदि) इसलिए उन को इन पहेलियों में रूचि उत्पन्न नहीं होती. लेकिन कहावतों की भांति इन पहेलियों को भी संरक्षित किया जाना आवश्यक है. पहेलियों में पुल्लिंग चीजों को नर और स्त्रीलिंग चीजों को नारी या तिरिया कहा गया है || एक नार जो औषध खाए, जिस पर थूके वह मर जाए, जब जब नर उसे छाती लगाए, तब तब वो काना हो जाए। उत्तर- बन्दूक (निशाना लगाते समय एक आँख बंद कर लेते है) एक नार दो सींगो से, नित उठ खेले धींगों से, जाके द्वार जाय के अड़े, मानुस लिये बिना नहिं टले| उत्तर - डोली एक नार ने अचरज किया, सांप मार पिंजरे में दिया, ज्यों ज्यों सांप ताल को खाए, सूखे ताल सांप मर जाए | उत्तर – दिया और बत्ती एक नार नौरंगी चंगी छै नाड़े लटकावे लोगों के संग जुआ खेले फिर भी नार कहावे ! उत्तर – तराजू एक नार पिया को भानी, तन बाको सगरा ज्यों पान...